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कैसे एक महिला ने उठाया फैजुल्लागंज को बदलने का बीड़ा, और देखते ही देखते खड़ा कर दिया तीन हज़ार कार्यकर्ताओं का संगठन

कैसे एक महिला ने उठाया फैजुल्लागंज को बदलने का बीड़ा, और देखते ही देखते खड़ा कर दिया 3000 लोगों की संस्था!

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दोस्तों अगर कुछ करने की भावना किसी के मन में हो तो क्या कठिनाइयाँ और क्या समस्याएँ? कुछ भी आगे नहीं आता जुनूनी लोगों के रास्ते में!
ऐसी ही एक इन्साइड स्टोरी प्रत्याशी.कॉम लेकर आया है एक महिला की जो पेशे से एक अध्यापिका है और उसके सामने थी समाज कि अनेक प्रकार की समस्याएँ जिनसे लड़ पाना किसी अकेले के बस की बात नहीं अगर उसका हौसला बुलंद ना हो।
इस महिला का नाम है ममता त्रिपाठी जो लखनऊ के फैजुल्लागंज वार्ड में एक छोटा सा विद्यालय चलाती हैं और उसी में हमारे आने वाले भविष्य को मज़बूत कर रही हैं।

अध्यापिका से समाजसेविका बनाने का ख़्याल कैसे आया?
कई वर्षों से फैजुल्लागंज में रह रही ममता ने अपने घर के आस पास के इलाक़ों की दुर्गति देखी, बिना रास्ते की गलियों में अंधेरों में अपराध देखे, सड़कों में टूटे फूटे सीवर देखे, लोगों के मल को सड़कों पे बरसात में बहते देखा और अनेक प्रकार की बीमारियाँ देखी और उनसे निपटने के लिए लाचार प्रशासन भी देखा। सुअरों का झुंड देखा जो फैजुल्लागंज कि सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है।

“मैं भी चाहती तो इन सब समस्याओं की अनदेखी करके अपना जीवन व्यतीत कर सकती थी मगर जिसके अंदर कुछ बदलने की चिंगारी जल रही होती है उसे कहाँ नींद आती है।”

शुरुआती दौर में बिना किसी की सहायता के लोगों की समस्याओं को सुलझाना, प्रशासन से सवाल पूछना – मगर अकेले आदमी की कौन सुनता। कुछ समय तक तो अकेले ही चल रही ममता ने एक संगठन खड़ा करने की ठानी जो ममता के मक़सद को पूरा कर सके!

समाजसेवा के क्षेत्र में कब से सक्रिय हैं?
2014 में इसकी शुरुआत एक संगठन के रूप में हुयी जिसका नाम उन्होंने बाल महिला सेवा संगठन रखा जिसका प्राथमिक मक़सद बच्चों की शिक्षा, महिलाओं को मज़बूत और आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही समाज सेवा करना था।

धीरे धीरे मैंने लोगों को अपने साथ आने को कहा, जो मेरे इरादों को समझ पाए वो साथ आते चले गए और मैं हर संकट में लोगों तक पहुँचने लगीं। अपने क्षेत्र के विकास की लड़ाई अब अकेली नहीं रह गयी थी सो प्रशासन को भी इसकी भनक समय समय पर लगती रही और शासन प्रशासन के आला अफ़सर फैजुल्लागंज की ख़बर लेते रहे।

आप की संस्था महिलाओं के लिए क्या करती है?
महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचार मुझे काफ़ी बेचैन कर देते थे इसलिए मैंने महिलाओं का एक समूह तैयार किया जो घर घर जाकर महिलाओं को जागरूक करने का कार्य करती रहती हैं और उन्हें सशक्त बनने में मदद भी करती हैं।

अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक लड़ाई?
इसको फैजुल्लागंज की एक त्रासदी ही कहेंगे की 2016 में फैजुल्लागंज में फैली महामारी और डेंगू से लगभग सत्तर लोगों की मौत हुयी यह आँकड़ा और भी बड़ा होता अगर हमारी संस्था ने प्रशासन को चैन से सोने दिया होता । तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के आदेश पर ज़िला प्रशासन ने फैजुल्लागंज का दौरा किया और एडीएम को एक एक गली में घुमाया गया तब जाके युद्ध स्तर पर राहत एवं बचाव कार्य सम्भव हो पाया!

जिसका नतीजा ये निकला की 2017 में शुरुआती दौर से फ़ॉगिंग करवायी गयी और 2017 में फैजुल्लागंज से एक भी डेंगू का मरीज़ नहीं मिला – ये हमारी और संस्था के सहयोगियों की सबसे बड़ी जीत थी!

कैसे मिली डेंगू पे जीत?
अपने फैजुल्लागंज को स्वच्छ बनाए रखने के मक़सद से हज़ारों की संख्या में बाल महिला सेवा संगठन के कार्यकर्ता दिन रात लगे रहे यह देख कर नगर निगम के ज़ोनल अफ़सर विनय प्रताप सिंह भी इस अभियान में शामिल हुए!
ये हमारे प्रयासों की ही देन है कि जिस क्षेत्र को नगर निगम कूड़े का ढेर मानता था आज उसी फैजुल्लागंज को प्रतिदिन नगर निगम के कर्मचारी साफ़ करने आते हैं।

इसके अलावा ग़रीबों को वस्त्र वितरण, बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा दिया, जो बच्चे स्कूल नहीं जाते पाए गए उनका ऐड्मिशन सरकारी स्कूलों में करवाया।

पुलिस के आला अधिकारियों को सख़्त निर्देश दिलवाए गए की फैजुल्लागंज में कोई भी अप्रिय घटना ना हो, और अगर हो तो तुरंत वहाँ पहुचें!

आगे का क्या लक्ष्य है? जनता से क्या है अपील!
पिछले दस सालों से भाजपा के पार्षद क्षेत्र में मौजूद हैं मगर फिर भी फैजुल्लागंज की ये तस्वीर शायद ही वहाँ का कोई निवासी देखना चाहता हो।
इसीलिए निकाय चुनाव को ध्यान में रखते हुए हमारी संस्था नें सिस्टम के अंदर जाने का निर्णय किया है और ख़ुद ना लड़ते हुए हमने फैजुल्लागंज के दो समाज सेवियों विनोद शर्मा (पार्षद प्रत्याशी फैजुल्लागंज तृतीय वार्ड न. 43) एवं आशा मौर्या ( पार्षद प्रत्याशी फैजुल्लागंज द्वितीय वार्ड न. 73) को निकाय चुनाव में बाल महिला सेवा संगठन के समर्थन से मैदान में खड़ा किया है जिसका एकमात्र संकल्प है हमारा आपका स्वच्छ, सुंदर, विकसित एवं अपराध मुक्त फैजुल्लागंज!

हमारे अगले पाँच साल का संकल्प पत्र
(1) स्वच्छता की गारंटी होगी
(2) सुन्दर फैजुल्लागंज बनाने का संकल्प
(3) विकसित फैजुल्लागंज का संकल्प
(4) हासिल करेगे अपराध मुक्त फैजुल्लागंज के लक्ष्य को
(5) 90 दिन के अंदर करेगे फैजुल्लागंज को सुअर मुक्त
(6) बन्धा बनने के लिए करेंगे मजबूत संघर्ष
(7) स्वास्थ्य सम्बन्धी संकल्प
(8) वरिष्ठ नागरिको के प्रति संकल्प
(9) गऊ संरक्षण के सम्बन्ध मे संकल्प
(10) शिक्षा सम्बन्धी संकल्प

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