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प्रदेश के मुख़िया ने उठाया क़दम, अब सिर्फ सरकारी स्कूलों में पढ़ेंगे प्रदेश के अधिकारियों के बच्चे?

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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने लिया एक और क्रांतिकारी क़दम, अब सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर कमर कस ली है इस प्रयास को लेके आप की क्या राय है!

सरकार ने इसी कड़ी में अहम योजना बनाई है। अब सरकारी अधिकारियों के बच्चे किसी हाईफाई स्कूल में नहीं सिर्फ़ सरकारी स्कूल में ही पढ़ेंगे। शिक्षा विभाग द्वारा योगी को दी गई प्रेजेंटेशन में इसका मसौदा तैयार किया गया है।
यही नहीं प्राइवेट स्कूलों में मनमानी फीस बढ़ोत्तरी को लेकर भी योगी सरकार गंभीर दिखाई दे रही है। सीएम योगी ने इसके लिए अलग से नियमावली बनाने के निर्देश दे दिए हैं।
करीब छह घंटे तक लोकभवन में शिक्षा विभाग के प्रेजेंटेशन के दौरान सीएम योगी ने अफसरों को 100 दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि ​इतने दिन में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन दिखाई देना चाहिए।
इसमें बच्चों को यूनिफार्म, कॉपी-किताब बांटने, कॉलेजों में लैबोरेट्री आदि बनाने, स्कूलों का विद्युतीकरण करने के साथ ही नकल के खिलाफ और सरकारी टीचरों द्वारा कोचिंग चलाने के मामलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रेजेंटेशन के दौरान​ डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और डॉ दिनेश शर्मा सहित मुख्य सचिव और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

सीएम योगी के निर्देश:


बेसिक शिक्षा विभाग :

– 100 दिन में बेसिक शिक्षा में बेहतर बदलाव हर हाल में दिखना चाहिए।
– 1 से 10 जुलाई के बीच छात्रें को यूनिफॉर्म, पाठ्य-पुस्तकों एवं बैग का वितरण हो जाए।
– छात्रों की उपस्थिति शत-प्रतिशत अनिवार्य कराएं ।
– पेयजल के साथ विद्यालयों में शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित कराएं ।
– राष्ट्रीय अविष्कार अभियान के तहत 1760 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में-विज्ञान और गणित लैब विकासित करने की कार्रवाई शुरू करें।
– कम्प्यूटर सहायतित शिक्षा कार्यक्रम के तहत 8628 विद्यालयों में सुविधा दें।
– शिक्षकों के चयन के लिए बेसिक शिक्षा चयन बोर्ड का गठन किया जाए।
– अगले 100 दिनों में प्रदेश के 45,809 परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक – विद्यालयों का विद्युतीकरण हो जाए।
– कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को यूनिफॉर्म के साथ दो जोड़ी मोजे और सर्दी में एक स्वेटर जरूर दें।
– आउट आॅफ स्कूल बच्चों का पता लगाने के लिए हाउसहोल्ड सर्वे कराया जाए।

उच्च शिक्षा विभाग :

– राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में एक समान पाठ्यक्रम लागू करते हुए सेशन नियमित किए जाएं।
– शिक्षकों की कमी जल्द दूर की जाए।
– भर्ती में पारदर्शिता के साथ ही इससे जुड़े लंबित वादों को जल्द निपटाया जाए।

माध्यमिक शिक्षा :

-नकल बड़ी समस्या है। नकल करवाने वालों और केंद्रों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
-दागी केंद्रों को ब्लैकलिस्ट और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।
-प्राइवेट स्कूल कॉलेजों द्वारा फीस को लेकर मनमानी वसूली की जा रही है, इसे रोकने के लिए नियमावली बनाई जाए।
-प्रदेश में बालिकओं को आत्मरक्षा के लिए समर्थ बनाने के लिए रानी लक्ष्मी बाई आत्मरक्षा कार्यक्रम और योग शिक्षा कार्यक्रम अनिवार्य किया जाए।
-कोचिंग चलाने वाले सरकारी शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।
-विद्यालय में अधिकतम 200 दिन में कोर्स पूरा किया जाए।
-शिक्षकों और छात्रों की नियमित उपस्थिति के लिए बायो​मैट्रिक्स के माध्यम से मॉनीटर की जाए।

व्यावसायिक शिक्षा :

-आईटीआई संस्थानों में पुराने ट्रेड जैसे रेडियो मैकेनिक आदि समाप्त किए जाएं।
-आईटीआई विद्यार्थियों को विदेशों में रोजगार दिलाने के लिए एनआरआई विभग से समन्वय कर कार्ययोजना बने।
-आईटीआई संस्थानों को दो शिफ्ट में चलाया जाए।

प्राविधिक शिक्षा :

-बंदी की कगार पर खड़े प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉेलेजों में व्यावसायिक गतिविधि रोकी जाए।
-यहां डिप्लोमा, फार्मा, नर्सिंग आदि कोर्स चलाने की संभावना तलाशें।